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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 62
अभङ्गपतने नृपमृत्युस्तस्करान् मधु करोति निलीनम्। हे चाप्यथ पुरोहितमुल्का पार्थिवस्य महिषीमशनिश्च ॥
यदि ध्वज का छत्र भङ्ग हो जाय तो राजा की मृत्यु, उस पर मधुमक्खियाँ मुहाल (छत्ता) लगावें तो चोरों का उपद्रव, उल्का गिरे तो पुरोहित का नाश और वज्रपात हो तो राजा की प्रधान रानी का नाश होता है।
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