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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 61
क्रव्यादकौशिककपोतककाककःবকটি। পান केतुस्थितैर्महदुशन्ति भयं नृपस्य चाषेण चापि युवराजभयं वदन्ति श्येनो विलोचनभयं निपतन् करोति ॥
यदि इन्द्रध्वज पर मांस खाने वाला पक्षी, उल्लू, कबूतर, काक या उजली चिल्ह बैठे तो राजा को अत्यन्त भय, नीलकण्ठ बैठे तो युवराज को भय और बाज बैठे तो नेत्रभय करता है।
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