मंगल आशीर्वाद और प्रणामों के द्वारा लगातार हुये मनुष्य के शब्दों से युत, ढोल, मृदङ्ग, राद्ध और मेरी के शब्दों से युत, वेदविहित वाक्यों को बार-बार पढ़ते हुये ब्राह्मणों से युत तथा मङ्गल शब्दों से युत ध्वज को राजा उठावे।
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