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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 56
छत्रध्वजादर्शफलार्द्धचन्द्रैर्विचित्रमालाकदलीक्षुदण्डैः सव्यालसिंहै: पिटकैर्गवाक्षैरलङ्कृतं दिक्षु च लोकपालैः ॥
छत्र, पतका, दर्पण, फल अर्द्धचन्द्र, अनेक प्रकार की जलायें, केले का वक्ष, ईख और दिक्पालों (इन्द्र, यम, नैऋत, वरुण, वायु, कुबेर और महादेव) से युत-
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