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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 55
प्रपूरणे चोच्छ्रयणे प्रवेशे स्नाने तथा माल्यविधौ विसर्गे। पठेदिमान्नृपतिः सोपवासो मन्त्रान् शुभान् पुरुहूतस्य केतोः ॥
इन्द्रध्वज को पिटकों से भूषित करने के समय, उठाने के समय, नगर में प्रवेश कराने के समय, स्नान कराने के समय, पुष्पमाला पहनाने के समय और विसर्जन के समय व्रती होकर राजा पूर्वोक्त मन्त्रों को पढ़े।
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