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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 53
अजोऽव्ययः शाश्वत एकरूपो विष्णुर्वराहः पुरुषः पुराणः । त्वमन्तकः सर्वहरः कृशानुः सहस्रशीर्षः शतमन्युरीड्यः ॥
एक रूप, व्यापक, चराह रूप, प्रधान पुरुष, चिरन्तन, यम स्वरूप, सबका संहार करने वाले, अग्नि, सहस शिर चांले, इन्द्र और स्तुति के योग्य तुम हो।
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