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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 51
हरार्कवैवस्वतशक्रसोमैर्धनेशवैश्वानरपाशभृद्धिः महर्षिसंधैः सदिगप्सरोभिः शुकाङ्गिरः स्कन्दमरुङ्गणैश्च ॥
महादेव, सूर्य, यन, इन्द्र, चन्द्र, कुबेर, अग्नि, वरुण, महर्षिगण, सब दिशायें, अप्सरायें, शुक्र, बृहस्प िकार्तिकय और वायुओं के समुदायों के द्वारा जिस तरह प्रकाशमान
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