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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 50
कुर्यादहनि चतुर्थे पूरणमिन्द्रध्वजस्य शास्त्रज्ञः । मनुना चागमगीतान् मन्त्रानेतान् पठेन्नियतः ॥
शास्त्रज्ञ ( इन्द्रध्वज-लक्षण को जानने वाले) चौचे (पूर्णिमा के दिन पिटकों से इन्द्रध्वज को भूषित करें और नियत होकर मनु राजा द्वारा आगम से प्रतिपादित वक्ष्यमाण मन्त्रों को पढ़ें।
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