मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 48
विज्ञातव्यं यद्यद्येन विभूषणममरेण विनिर्मितं ध्वजस्यार्थे । तत्तत्तदैवत्यं विपश्चिद्धिः ॥
आगे के भाग में विस्तृत और लाक्षारस के समान लोहित वर्ण का तेरहवाँ भूपण शिर में दिया। जिस-जिस देवता ने इन्द्रध्वज के लिये जो-जो भूषन बनाया, वही उस भूषण के देवता हैं, यह पण्डितों को जानना चाहिये ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें