आगे के भाग में विस्तृत और लाक्षारस के समान लोहित वर्ण का तेरहवाँ भूपण शिर में दिया। जिस-जिस देवता ने इन्द्रध्वज के लिये जो-जो भूषन बनाया, वही उस भूषण के देवता हैं, यह पण्डितों को जानना चाहिये ।
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