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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 42
रक्ताशोकनिकाशं चतुरस्रं विश्वकर्मणा प्रथमम्। रशना स्वयम्भुवा शङ्करेण चानेकवर्णगा दत्ता ॥
विश्वकर्मा ने लाल अशोक के समान कान्ति वाला चौकोर प्रथम आभूषण इन्द्रध्वज को दिया। ब्रह्मा और शंकर ने अनेक रंग वाली दूसरी रशना ( तगड़) दी।
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