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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 4
श्रीपतिमचिन्त्यमसमं समं ततः सर्वदेहिनां सूक्ष्मम् । परमात्मानमनादिं विष्णुमविज्ञातपर्यन्तम् ॥
लक्ष्मीनाथ, अचिन्त्य, अनौपम्य, सभी प्राणियों में गत होने के कारण सम, सभी प्राणियों के द्वारा बड़ी कठिनता से जानने योग्य होने के कारण सूक्ष्म, परमात्मा, अनादि (उत्पत्ति-रहित), विष्णु (व्यापक), अज्ञात निधन बाले- इस तरह इन्द्र के साथ देवताओं से संस्तुत
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