गुडपूपपायसाद्यैर्विप्रानभ्यर्च्य दक्षिणाभिश्च । श्रवणेन द्वादश्यामुत्थाप्योऽन्यत्र वा श्रवणात् ॥
गुड़, पूप ( पिट्टी), पायस और दक्षिणाओं से ब्राह्मणों की पूजा करके श्रवण नक्षत्रयुत द्वादशी तिथि में या श्रवण नक्षत्रयुत अन्य किसी तिथि में ध्वजा को उठाना चाहिये ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।