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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 38
गुडपूपपायसाद्यैर्विप्रानभ्यर्च्य दक्षिणाभिश्च । श्रवणेन द्वादश्यामुत्थाप्योऽन्यत्र वा श्रवणात् ॥
गुड़, पूप ( पिट्टी), पायस और दक्षिणाओं से ब्राह्मणों की पूजा करके श्रवण नक्षत्रयुत द्वादशी तिथि में या श्रवण नक्षत्रयुत अन्य किसी तिथि में ध्वजा को उठाना चाहिये ।
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