मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 35
ध्वजकुम्भहयेभभूभृतामनुरूपे वशमेति भूभृताम्। उदयास्तघराघराऽधरा हिमवद्विन्ध्यपयोधरा घरा ॥
पताका, घड़ा, घोड़ा या हाथियों के समान अग्नि हो तो उदयाचल और अस्ताचलरूप ओष्ठ, हिमालय और विन्ध्याचलरूप स्तन वाली पृथ्वी उस राजा के वश में हो जाती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें