मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 34
येषां रथौधार्णवमेघदन्तिनां समस्वनोऽग्निर्यदि वापि दुन्दुभेः । तेषां मदान्येभघटावघट्टिता भवन्ति याने तिमिरोपमा दिशः ॥
यदि अग्नि में समुद्र, मेघ, हाथी या नगाड़े के समान शब्द हो तो उस राजा के गमन करने के समय मदमत्त हाथियों से व्याप्त दिशायें अन्धकार की तरह हो जाती हैं अर्थात् उस राजा के पास हाथियों की अधिकता होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें