चामीकराशोककुरण्टकाब्जवैदूर्यनीलोत्पलसन्निभेऽग्नौ न ध्वान्तमन्तर्भवनेऽवकाशं करोति रत्नांशुहतं नृपस्य ॥
यदि सुवर्ण, अशोक, कुरण्टक, वैदूर्य मणि या नील कमल के समान कान्ति वाली अग्नि हो तो हवन कराने वाले राजा के भवन में ठहरने के लिये रत्नों की किरणों से नष्ट होकर अन्धकार अवकाश नहीं पाता है।
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