अभिलपित द्रव्यों के समान, सुगन्धयुत, निर्मल, घना और लपटदार अग्नि शुभ करने वाली और इससे भित्र लक्षणयुत अग्नि अशुभ करने वाली होती है। इस सम्बन्ध को लेकर योगयात्रा नामक ग्रन्थ में मैंने विस्तारपूर्वक कहा है।
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