इस तरह वर प्राप्त कर इन्द्र के साथ देवताओं ने क्षीरसागर जाकर भगवान् नारायण की इस प्रकार स्तुति की- श्रीवत्सचिह्न से युत, कौस्तुभ मणि की किरणों से प्रकाशित वक्षःस्थल वाले,
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