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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 29
सन्तक्ष्य पुनस्तक्षा विधिवद्यष्टिं प्ररोपयेद्यन्त्रे । जागरमेकादश्यां नरेश्वरः कारयेच्चास्याम् ॥
४८५ फिर बई विधिपूर्वक यष्टि को छीलकर खराज पर चढ़ावे। राजा आगे आने वाली एकादशी में जागरण करे। घेत वख और पगड़ी बाँधे हुए
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