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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 27
तन्त्र पताकाः श्वेता भवन्ति विजयाय रोगदाः पीताः। जयदाश्च चित्ररूपा रक्ताः शस्त्रप्रकोपाय ॥
उस नगर में श्वेत वर्ण की पताका विजय के लिये, पीत वर्ण की रोग देने वाली, अनेक वर्ण को विजय कराने के लिये और रक्त वर्ण की पताका शस्त्रप्रकोप के लिये होती है।
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