अर्ध्याचतापणगृहं प्रभूतपुण्याहवेदनिर्घोषम्। मा नटनर्तकगेयज्ञैराकीर्णचतुष्पथं नगरम् ॥
सुन्दर वेप वाली वेश्याओं से व्याप्त, सजी हुई दुकानों से युत, अधिक पुण्याह और वेद के शब्दों से युत, नट, नाचने वाले और गान विद्या जानने बालों से व्याप्त चतुष्पथ (चौराहे) वाला नगर होना चाहिये ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।