नृपजयदमविध्वस्तं पतनमनाकुञ्चितं च पूर्वोदक् । अविलग्नं चान्यतरी विपरीतमतस्त्यजेत्पतितम् ॥
अखण्डित या अवक्र होकर और पूर्व या उत्तर दिशा में वृक्ष का गिरना राजा की विजय करने वाला होता है। इनसे भित्र लक्षणयुत होकर (खण्डित या वक्र होकर आग्नेय, दक्षिण, नैर्ऋत्य, पश्चिम या वायव्य कोण में) वृक्ष का गिरना अशुभ है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।