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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 19
छिन्द्यात् प्रभातसमये वृक्षमुदक् प्राङ्मुखोऽपि वा भूत्वा । परशोर्जर्जरशब्दो नेष्टः स्निग्धो घनश्च हितः ॥
बाद में सूर्योदय के समय उत्तर या पूर्व-मुख होकर वृक्ष को काटे। परशु (फरसा = कुल्हार) का जर्जर शब्द निकलना शुभ नहीं है, किन्तु मधुर और घने शब्द का निकलना शुभ है।
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