अर्जुन (काहू), अजकर्ण, प्रियक, धव और गूलर-ये पाँच वृक्ष ध्वज के लिये शुभ होते हैं। इनमें एक या अन्य वृक्ष वक्ष्यमाण शुभ लक्षणों से युत हैं।।१५।। अर्जुनो वृक्षः श्रेष्ठः प्रशस्तः। अजकर्णः। प्रियकः। धवः। उदुम्बरः। एते पञ्च श्रेष्ठाः। एतेषां मध्यादेकतममन्यतमम्। अथवाऽपरमन्यं वृक्षं प्रशस्तं शुभलक्षणमित्यर्थः ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।