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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 15
श्रेष्ठोऽर्जुनोऽजकर्णः प्रियकधवोदुम्बराश्च पञ्चैते । एतेषामेकतमं प्रशस्तमथवापरं वृक्षम् ॥
अर्जुन (काहू), अजकर्ण, प्रियक, धव और गूलर-ये पाँच वृक्ष ध्वज के लिये शुभ होते हैं। इनमें एक या अन्य वृक्ष वक्ष्यमाण शुभ लक्षणों से युत हैं।।१५।। अर्जुनो वृक्षः श्रेष्ठः प्रशस्तः। अजकर्णः। प्रियकः। धवः। उदुम्बरः। एते पञ्च श्रेष्ठाः। एतेषां मध्यादेकतममन्यतमम्। अथवाऽपरमन्यं वृक्षं प्रशस्तं शुभलक्षणमित्यर्थः ।
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