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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 13
उद्यानदेवतालयपितृवनवल्मीकमार्गचितिजाताः कुब्जोर्ध्वशुष्ककण्टकिवल्लीवन्दाकयुक्ताश्च ॥
उद्यान (फुलवाड़ी), देवालय, श्मशान, वल्मीक (वमई दिवड़ा भीड़), मार्ग तथा यज्ञभूमि में उत्पत्र, कुबड़ा, खड़े ही सूख गये, काँटेदार, लताओं से युत
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