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बृहत्संहिता • अध्याय 42 • श्लोक 8
तौलिनि तान्तवभाण्डं मणिकम्बलकाचपीतकुसुमानि । आदद्याद्धान्यानि च वर्षार्द्धाद् द्विगुणिता वृद्धिः ॥
तुला राशिगत सूर्य के समय पूर्वोक्त उत्पातों को देखकर सूती तथा ऊनी वत्र, वर्तन, मणि, कम्बल, काँच, पीले वत्र, पुष्प और धान्यों का संग्रह करके छठे मास में विक्रय करने से दूना लाभ होता है।
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