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बृहत्संहिता • अध्याय 42 • श्लोक 6
सिंहे सुवर्णमणिचर्मवर्मशस्त्राणि मौक्तिकं रजतम् । इममासे लब्धिर्विक्रतुरतोऽन्यथा छेदः ॥
सिंह राशिगत सूर्य के समय में सोना, मणि, चमड़ा, शख, मोती और चाँदी का संग्रह करके पाँचवें मास में विक्रय करने से लाभ होता है। न्यूनाधिक काल में विक्रय करने से हानि होती है।
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