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बृहत्संहिता • अध्याय 42 • श्लोक 3
मेषोपगते सूर्ये ग्रीष्मजधान्यस्य संग्रहं कृत्वा । वनमूलफलस्य वृषे चतुर्थमासे तयोर्लाभः ॥
मेष राशि में स्थित सूर्य के समय में ग्रीष्म प्रऋतु में उत्पन्न होने वाले धान्यों का तथा बृष राशि में स्थित सूर्य के समय में उसमें होने वाले मूल और फलों का संग्रह करे, उन (मेष और वृष) से चतुर्थ मास में उसको विक्रय करने से लाभ होता है।
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