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बृहत्संहिता • अध्याय 42 • श्लोक 2
ब्रूयादर्घविशेषान् प्रतिमासं राशिषु क्रमात् सूर्ये। अन्यतिथावुत्पाता ये ते डमरार्तये राज्ञाम् ॥
(रजोनिहार, दिग्दाह और गन्धर्वनगर रूप) उत्पातों को देख कर द्रव्यों के विशेष मौल्य का विचार करना चाहिये। अन्य ( अमावास्या और पूर्णिमा से भिन्न) तिथि में होने वाले उत्पात राजाओं को शत्र-कलह से पीड़ित करते हैं।
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