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बृहत्संहिता • अध्याय 42 • श्लोक 14
सवितृसहितः सम्पूणों वा शुभैर्युतवीक्षितः शिशिरकिरणः सद्योऽर्घस्य प्रवृद्धिकरः स्मृतः । अशुभसहितः सन्दृष्टो वा हिनस्त्यथवा रविः प्रतिगृहगतान् भावान् बुद्ध्वा वदेत् सदसत्फलम् ॥
जिस राशि में सूर्ययुत चन्द्र या पूर्णचन्द्र शुभग्रह (बुध, बृहस्पति और शुक) से पुत या दृष्ट हो, उस राशिसम्बन्धी द्रव्य में मौल्य की वृद्धि करता है तथा जिस राशि में पापग्रह (मङ्गल और शनि से युत या दृष्ट हो, उस राशिसम्बन्धी द्रव्यों का नाश करता है। इसी प्रकार प्रत्येक राशिगत द्रव्यों को जानकर शुभाशुभ फल कहना चाहिये ।
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