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बृहत्संहिता • अध्याय 42 • श्लोक 12
सवितरि झषमुपयाते मूलफलं कन्दभाण्डरलानि । संस्थाप्य वत्सरार्द्ध लाभकमिष्टं समाप्नोति ॥
मीन राशिगत सूर्य के समय पूर्वोक्त उत्पात होने पर मूल, फल, कन्द, बर्तन और रत्नों का संग्रह करके छः मास बाद बेचने से मनमाना लाभ होता है।
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