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बृहत्संहिता • अध्याय 42 • श्लोक 11
मृगघटसंस्थे सवितरि गृह्णीयाल्लोह भाण्डधान्यानि । स्थित्वा मासं दद्याल्लाभार्थी द्विगुणमाप्नोति ॥
मकर या कुम्भ राशिगत सूर्य के समय पूर्वोक्त उत्पात होने पर लोहा, बर्तन और धान्यों का संग्रह करके एक मास बाद बेचने से लाभाथों व्यापारी दूना लाभ प्राप्त करता है। मृगो मकरः । घटः कुम्भः। सवितर्यादित्ये मृगपटसंस्थे लोहभाण्डधान्यानि गृहीयात् स्थापयेत्। लोहमयानि भाण्डानि धान्यानि च मासं स्थित्वा मासं संस्थाप्य ततो दद्याद्विक्रयं कुर्यात्। लाभार्थी द्विगुणं लाममाप्नोति लभते ।
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