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बृहत्संहिता • अध्याय 41 • श्लोक 13
गोचरपीडायामपि राशिर्वलिभिः शुभग्रहैर्दृष्टः । पीडां न करोति तथा क्रूरैरेवं विपर्यासः ॥
गोचर-पीड़ा में स्थित राशि (बृहस्पति आदि ग्रहों को उक्त चतुर्थ आदि शुभ स्थानों से भित्र स्थान में स्थित होने पर राशि गोचर पीड़ा में स्थित रहती है, ऐसी राशि) यदि बली शुभग्रह ( बुध, गुरु और शुक्र) से देखी जाती हो तो पोड़ा नहीं करती है अर्थात् वे द्रव्य सम मूल्य में रहते हैं। यदि पापग्रह (रवि, मंगल और शनि ) से देखी जाती हो तो उस राशि के कथित द्रव्य महर्ष और दुर्लभ होते हैं।
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