जिस राशि से पीड़ास्थान ( उपचयस्थान) में स्थित होकर पापग्रह (रवि, मङ्गल, शनि) बली ( मित्रगृह, स्वगृह, उच्च या स्वनवांश में स्थित या शुभग्रहों से दृष्ट ) हो तो उस राशि के कथित द्रव्य अधिक मूल्य वाले और अलभ्य होते हैं।
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