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बृहत्संहिता • अध्याय 41 • श्लोक 11
राशेर्यस्य कूराः पीडास्थानेषु संस्थिता बलिनः । तत्प्रोक्तद्रव्याणां महार्घता दुर्लभत्वं च ॥
जिस राशि से पीड़ास्थान ( उपचयस्थान) में स्थित होकर पापग्रह (रवि, मङ्गल, शनि) बली ( मित्रगृह, स्वगृह, उच्च या स्वनवांश में स्थित या शुभग्रहों से दृष्ट ) हो तो उस राशि के कथित द्रव्य अधिक मूल्य वाले और अलभ्य होते हैं।
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