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बृहत्संहिता • अध्याय 41 • श्लोक 10
षट्सप्तमगो हानिं वृद्धिं शुक्रः करोति शेषेषु । उपचयसंस्थाः कूराः शुभदाः शेषेषु हानिकराः ॥
उस राशि के कथित द्रव्यों की हानि और शेष स्थान (प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पञ्चम, अष्टम, नवम, दशम, एकादश या द्वादश) में स्थित हो तो उनको वृद्धि करता है तथा जिस राशि से पापग्रह ( रवि, मङ्गल और शनैहार) उपचय तृतीय, षष्ठ या एकादश) में स्थित हो, उसके द्रव्यों की वृद्धि और शेष स्थान (प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, पश्चम, सप्तम, अष्टम, नवम, दशम या द्वादश में स्थित हो तो हानि करता है।
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