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बृहत्संहिता • अध्याय 40 • श्लोक 7
कुम्भे गुरुर्गवि शशी सूर्योऽलिमुखे कुजार्कजी मकरे । निष्पत्तिरस्ति महती पश्चात् परचक्र भयरोगम् ॥
यदि कुम्भ में गुरु, वृष में चन्द्रमा, वृश्चिक के आदि में सूर्य तथा मकर में मङ्गल और शनि स्थित हो तो धान्यों की अधिक निष्यत्ति होती है; किन्तु बाद में परचक्र का आगमन और रोग का भय होता है।
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