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बृहत्संहिता • अध्याय 40 • श्लोक 6
लाभहिबुकार्थयुक्तः सूर्यादलिगात् सितेन्दुशशिपुत्रैः । सस्यस्य परा सम्पत् कर्मणि जीवे गवां चाध्या ॥
यदि वृश्चिक राशि में स्थित सूर्य से एकादश में शुक्र, चतुर्म में चन्द्र और द्वितीय में बुध स्थित हो तो धान्यों की उत्तम निष्पत्ति होती है। यदि पूर्वोक्त योग में दशम स्थित गुरु हो तो गायों में उत्तम सम्पत्ति (दूध की अधिकता) होती है।
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