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बृहत्संहिता • अध्याय 40 • श्लोक 5
शुभमध्येऽलिनि सूर्याद् गुरुशशिनोः सप्तमे परा सम्पत् । अल्यादिस्थे सवितरि गुरौ द्वितीयेऽर्द्धनिष्पत्तिः ॥
दो शुभ ग्रहों के मध्य में स्थित होकर सूर्य वृद्धिक राशि में स्थित हो और सूर्य से सप्तम में गुरु और चन्द्रमा हो तो धान्यों की उत्तम निष्पत्ति होती है तथा वृश्चिक के आदि में सूर्य और उससे द्वितीय में गुरु हो तो धान्यों की आधी निष्पत्ति होती है।
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