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बृहत्संहिता • अध्याय 40 • श्लोक 4
अर्कात् सिते द्वितीये बुधेऽथवा युगपदेव वा स्थितयोः । व्ययगतयोरपि तद्वत्रिष्पत्तिरतीव गुरुदृष्ट्या ॥
यदि सूर्य से द्वितीय या द्वादश में शुक्र या बुध या दोनों एक साथ स्थित हों तो ग्रीष्म ऋतु में होने वाले धान्यों की निष्पत्ति होती है। यदि पूर्वोक्त योगों में बृहस्पति की दृष्टि हो तो ग्रीष्म ऋतु में होने वाले धान्यों की उत्तम निष्पत्ति होती है ।
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