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बृहत्संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 3
त्यजतोऽर्कतलं शशिनः पश्चादवलम्बते यथा शौक्ल्यम् । दिनकरवशात् तथाइन्दोः प्रकाशतेऽधः प्रभृत्युदयः ॥
जैसे ही चंद्रमा सूर्य की सतह से निकलता है, उसकी पीठ सूर्य से प्रकाशित हो जाती है। इसी प्रकार चंद्रमा का चक्र भी नीचे से (बढ़ती मात्रा में) चमकने लगता है।
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