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बृहत्संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 29
भस्मनिभः परुषोऽरुणमूर्तिः शीतकरः किरणैः परिहीणः । श्यावतनुः स्फुटितः स्फुरणो वा क्षुड्डमरा (क्षुड्समरा) मयचौरभयाय ॥
यदि चंद्रमा राख के रंग का, गंदा लाल, किरणों से रहित और काले रंग का हो और टूटा हुआ या अस्थिर दिखाई दे, तो लोग भूख, कोलाहल, महामारी, बीमारी और चोरों के खतरे से पीड़ित होंगे।
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