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बृहत्संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 22
भिन्नः सितेन मगधान् यवनान् पुलिन्दान् नेपालभृंगिमरुकच्छ (मरुकुच्च) सुराष्ट्रमद्रान् । पांचालकैकयकुलूतकपुरुषादान् हन्यादुशीनरजनान् अपि सप्त मासान् ॥
जब चंद्रमा की कक्षा मध्य में शुक्र के संपर्क से दो भागों में विभाजित हो जाती है, तो मगध के लोग, यवन, पुलिंद के लोग, नेपाली, भृंगी, मारवाड़ी, कच्छ और सूरत के लोग, मद्र के लोग, पांचाल, केकय, कुलुथक, पुरूषाद (नरभक्षी) और उसेनार (कंधार) के लोगों को 7 महीने तक सभी प्रकार के दुखों का सामना करना पड़ेगा।
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