मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 2
सलिलमये शशिनि रवेर्दीधितयो मूर्छितास्तमो नैशम् । क्षपयन्ति दर्पणोदर*निहिता इव मन्दिरस्यान्तः ॥
सूर्य की किरणें पानी से भरे चंद्रमा पर पड़ने और उससे परावर्तित होने से (पृथ्वी पर) रात के अंधेरे को उसी तरह दूर कर देती हैं, जैसे एक दर्पण (सूर्य में रखे गए) से परावर्तित प्रकाश एक कमरे के भीतर के अंधेरे को दूर कर देता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें