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बृहत्संहिता • अध्याय 38 • श्लोक 7
निपतति रजनीत्रितयं चतुष्कमप्यन्नरसविनाशाय । राज्ञां सैन्यक्षोभो रजसि भवेत् पञ्चरात्रभঐ ॥
यदि तीन या चार रात्रि तक बराबर पूलि गिरती रहे तो अत्र और रस के विनाश के लिये होती है। यदि पाँच रात्रि तक लगातार धूलि का वर्षण हो तो राजाओं की सेनाओं में खलबली मचती है।
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