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बृहत्संहिता • अध्याय 38 • श्लोक 6
रजनीद्वयं विसर्पति तस्मिन् राष्ट्रे रजोधनं बहुलम् । परचक्रस्यागमनं तस्मिन्नपि सन्नियोद्धव्यम् ॥
जिस देश में दो रात्रि तक बराबर घनीभूत पूलि फैलती है, उस देश में निश्चय ही किसी दूसरे राजा का आगमन कहना चाहिये ।
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