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बृहत्संहिता • अध्याय 38 • श्लोक 1
कथयन्ति पार्थिववयं रजसा घनतिमिरसञ्चयनिभेन । अविभाव्यमानगिरिपुरतरवः सर्वा दिशश्छत्राः ॥
जब घने अन्धकार की तरह धूलि से पर्वत, पुर, वृक्ष और सब दिशायें व्याप्त हो जाने से कुछ भी नहीं दिखाई देता हो, तो उस समय राजा का नाश कहना चाहिये ।
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