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बृहत्संहिता • अध्याय 37 • श्लोक 1
प्रतिसूर्यकः प्रशस्तो दिवसकृदृतुवर्णसप्रभः स्निग्धः । वैदूर्यनिभः स्वच्छः शुक्लच क्षेमसौभिक्षः ॥
सूर्य के ऋतु वर्ष (तीसरे अध्याय के तेईसवें पद्य में उक्त) के सदृश वर्ण का प्रतिसूर्य होता है। यदि यह निर्मल, वैदूर्यमणि की तरह स्वच्छ और खेत हो तो क्षेम और सुभिक्ष करता है।
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