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बृहत्संहिता • अध्याय 36 • श्लोक 4
गन्धर्वनगरमुत्थितमापाण्डुरमशनिपातवातकरम् दीप्ते नरेन्द्रमृत्युवमेिऽरिभयं जयः सव्ये ॥
पाण्डुर ( बेत = 'शुक्ल-शुत्र-शुचि-प्रेत-विराद-श्येत-पाण्डुरा' इत्यमरः) वर्ण का गन्धर्वनगर दिखाई दे तो बज्रपात के साथ वायु करता है। दोप्त दिशा ( ८६ अध्याय के १२ वें पद्योक्त) में स्थित हो तो उस दिशा में स्थित राजा का मरण होता है तथा वाम में शत्रु का भय और दक्षिण में जय करता है।
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