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बृहत्संहिता • अध्याय 36 • श्लोक 2
नागरनृपतिजयावहमुदग्विदिक्स्थं विवर्णनाशाय । शान्ताशायां दृष्टं सतोरणं नृपतिविजयाय ॥
यदि उत्तर दिशा में गन्धर्वनगर स्थित हो तो राजाओं को विजय देने वाला होता है। विदिशा (ईशान, आग्नेय, वायव्य और नैऋत्य में स्थित हो तो संकर (नीच जाति) का नाश करता है तथा शान्त दिशा में तारायुत दिखाई दे तो राजा के विजय के लिये होता
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