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बृहत्संहिता • अध्याय 35 • श्लोक 4
विदिगुद्धतं दिक्स्वामिनाशनं व्यनजं मकरकारि । पाटलपीतकनीलैः शस्त्राग्निक्षुत्कृता दोषाः ॥
विदिशा ( ईशान, आग्नेय, नैऋत्य और वायव्य) में यदि इन्द्रधनुष दिखाई दे तो उस दिशा के स्वामी ( ८६ वें अध्याय के ३४ वें पद्म में उक्त) का नाश होता है। थोड़ा लाल, पीला और नीला इन्द्रधनुष हो तो क्रम से शखदोष, अग्निदोष और दुर्भिक्ष करता है।
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