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बृहत्संहिता • अध्याय 35 • श्लोक 3
अच्छिन्नमवनिगावं द्युतिमत् स्निग्धं धनं विविधवर्णम् । द्विरुदितमनुलोमं च प्रशस्तमम्भः प्रयच्छति च ॥
अखण्ड, पृथ्वी में लगा हुआ, उज्ज्वल, निर्मल, अविकल, अनेक वर्णयुत, दो बार उदित या पश्चिम में स्थित इन्द्रधनुष दिखाई दे तो शुभ फल और बहुत वृष्टि करने वाला होता है। विशेष-यहाँ पर कोई-कोई अनुलोम का अर्थ दक्षिण दिशा में और दूसरा उत्तर दिशा में ऐसा कहते है।
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